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Gang of Loan Fraudsters Arrested

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The Anti-Bank Fraud Wing of the Central Crime Branch (CCB), Chennai, has busted a Delhi-based gang, which duped people with offers of hassle-free and low interest loans.

The gang allegedly conned people in Tamil Nadu, Andhra Pradesh and Kerala by collecting fees after promising them loans in the names of firms such as Tamilar Finance, Varalakshmi Finance and Bajaj Finance.

The CCB had registered a case on a complaint from Kanakalakshmi, of Pallikaranai, who lost ₹82,000. During the investigation, they stumbled upon more such complaints and the special team, after analysing call records and mobile phone tower locations, zeroed in on the accused in Delhi.

After camping in the national capital for the last 10 days, during which they searched in Dabri, Vikas Puri, Virender Nagar and surrounding areas, the team arrested M. Ashok Kumar, 28, A. Kamatchi, 30, of Dabri Main Extension, D. Rajavel, 25, of Palam, and Abhishek Pal, 24, of Mohan Garden. Mobile phones, SIM cards and records relating to bank transactions and other documents were seized from them. The four were produced before a court and brought to the city.

Modus Operandi

The criminals would randomly call people and introduce themselves as representatives of finance firms before making them a special loan offer. They would promise them hassle-free loans at very low interest rates. If the victim agreed, the call would be transferred to a person dubbed ‘master’.

The gang would then ask the victims to send documents over WhatsApp or e-mail, and then send them a fake loan approval letter. They would then ask them to deposit a fee in a particular bank account under file charges, refundable security amount and processing fees.

They would switch off their mobile phones after collecting the money.

 

Police sources said the gang procured SIM cards through agents using the identity proof of daily wage labourers at liquor shops and platform dwellers for ₹500 to ₹1,000, which they used to call their targets. They also opened bank accounts and obtained cheque books, credit/debit cards and SIM cards in the name of shelterless persons.

The police also suspect that the gang cheated people after receiving processing fees by posing as leading telecom service providers to lease out their land to set up mobile communication towers.

WeSeSo Advice

The following must be kept in mind to avoid being victim of Loan fraud:

  • Never disclose your personal details to the caller. After obtaining details of the offer, ask him to call back later. In the meantime, search for the official site of the loan disbursing company and contact its customer care for verification of such offer.
  • Never use the customer care number given by the caller. It may be fake.
  • Never fall for low interest loan from unknown financial companies. For known ones, it is better to make a visit to the nearest branch before making any payment.
  • The approval letters sent may be fake. It is better to get it physically verified either through calling customer care of the loan approving company or by visiting the nearest branch.
  • Never share your bank details, credit or debit card details, UPI pin or OTP with anyone, including the bank. 
  • Immediately call National Helpline Number 155260 if you become a victim and report on cybercrime.gov.in

 

WeSeSo Learning Foundation, a non-profit organization, aims to make a cyber-safe society with school students as the Agents of Change. If you find it useful then share it with others and help us secure the society because our motto is – We Secure Society.

www.weseso.org

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आसान लोन के नाम पर ठगी - जालसाजों का गिरोह गिरफ्तार

समाचार

सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB), चेन्नई की एंटी-बैंक फ्रॉड विंग ने दिल्ली के एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने लोगों को आसान और कम ब्याज पर कर्ज देने की पेशकश की थी।

  • गिरोह ने कथित तौर पर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में लोगों को तमिलर फाइनेंस, वरलक्ष्मी फाइनेंस और बजाज फाइनेंस जैसी फर्मों के नाम पर ऋण देने का वादा करके फीस वसूल कर ठगी की ।
  • सीसीबी ने एक भुक्तभोगी  की शिकायत पर मामला दर्ज किया था, जिसे ₹82,000 का नुकसान हुआ था। जांच के दौरान, उन्हें ऐसी और शिकायतें मिलीं और विशेष टीम ने कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल फोन टावर लोकेशन का विश्लेषण करने के बाद दिल्ली में आरोपियों का पता लगाया।
  • टीम ने पिछले 10 दिनों से राष्ट्रीय राजधानी में डेरा दाल कर  आरोपियों को गिरफ्तार किया । उनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। चारों को कोर्ट में पेश कर शहर लाया गया।

 

काम करने का ढंग

  • अपराधी  लोगों को फ़ोन पर खुद को वित्त फर्मों के प्रतिनिधियों के रूप में पेश करते थे एवं उन्हें बहुत कम ब्याज दरों पर आसानी से  ऋण देने का वादा करते थे  । यदि पीड़ित सहमत हो जाते थे , तो कॉल को मैनेजर  को स्थानांतरित कर दिया जाता था ।
  • फिर गिरोह पीड़ितों को व्हाट्सएप या ई-मेल पर दस्तावेज भेजने के लिए कहता था , और फिर उन्हें एक नकली ऋण स्वीकृति पत्र भेजता था । फिर वे उन्हें फाइल शुल्क, रिफंडेबल सुरक्षा राशि और प्रोसेसिंग शुल्क  एक विशेष बैंक खाते में जमा करने के लिए कहते थे ।
  • पैसे जमा करने के बाद वे अपना मोबाइल फोन बंद कर देते थे।
  • पुलिस सूत्रों ने कहा कि गिरोह ने एजेंटों के माध्यम से शराब की दुकानों और प्लेटफॉर्म पर रहने वालों के पहचान प्रमाण का उपयोग करके ₹500 से ₹1,000 तक सिम कार्ड खरीदे, जिससे  वे कॉल करते  थे। इन्ही पहचान पत्रों का उपयोग करके उन्होंने बैंक खाते भी खोले और आश्रयहीन व्यक्तियों के नाम पर चेक बुक, क्रेडिट/डेबिट कार्ड और सिम कार्ड प्राप्त किए।
  • पुलिस को यह भी संदेह है कि गिरोह ने मोबाइल संचार टावर स्थापित करने के लिए अपनी जमीन पट्टे पर देने के लिए भी प्रोसेसिंग फी लेकर लोगों को धोखा दिया।

WeSeSo सलाह

  • ऋण धोखाधड़ी का शिकार होने से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
  • फोन करने वाले को कभी भी अपने व्यक्तिगत विवरण का खुलासा न करें। प्रस्ताव का विवरण प्राप्त करने के बाद, उसे बाद में कॉल करने के लिए कहें। इस बीच, ऋण वितरण कंपनी की आधिकारिक साइट खोजें और इस तरह के प्रस्ताव के सत्यापन के लिए उसके ग्राहक सेवा से संपर्क करें।
  • कॉलर द्वारा दिए गए कस्टमर केयर नंबर का कभी भी उपयोग न करें। यह नकली हो सकता है।
  • अज्ञात वित्तीय कंपनियों से कम ब्याज वाले ऋण के झांसे में न आएं। अच्छी कंपनी की शाखा अधिक संभव आपके आसपास होगा।  किसी भी भुगतान करने से पहले निकटतम शाखा में जाकर लोन की प्रक्रिया करना  बेहतर है।
  • भेजे गए अप्रूवल  पत्र नकली हो सकते हैं। बेहतर होगा कि इसे या तो लोन मंजूर करने वाली कंपनी के कस्टमर केयर में कॉल करके या नजदीकी ब्रांच में जाकर फिजिकली वेरिफाई किया जाए।
  • बैंक सहित कभी भी अपना बैंक विवरण, क्रेडिट या डेबिट कार्ड विवरण, यूपीआई पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।शिकार बनने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 155260 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें

WeSeSo Learning Foundation, एक गैर-लाभकारी संगठन, का उद्देश्य स्कूली छात्रों को परिवर्तन के एजेंट के रूप में साइबर-सुरक्षित समाज बनाना है। यदि आपको यह उपयोगी लगे तो इसे दूसरों के साथ साझा करें और समाज को सुरक्षित करने में हमारी मदद करें क्योंकि हमारा आदर्श वाक्य है - वी सिक्योर सोसाइटी ।

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